Thursday, 26 January 2012

(अन्ना के आन्दोलन से परेशान नेता )

पहले अंग्रेजो को भगाया था, अब नेताओं की बारी है
जंग तब जारी थी जंग अब भी जारी है 
बस फर्क इतना है 
उनकी चमडी सफेद थी, इनके कपडे सफेद है 
जंग तब भी जारी थी, जंग अब भी जारी है 
उन अंग्रेजो का एक ही जात, एक मजहव हुआ करता था
पर अब 
कोई गुजराती, कोई मराठी, कोई बिहारी है
जंग तब भी जारी थी जंग अब भी जारी है
जब उन अग्रजों को भगाया तब बे बेगाने थे
पर अब
नेता भी हमारे है, और ये धरती माँ भी हमारी है
जंग तब भी जारी थी जंग अब जारी है
पर अब ये काहा जाता है गली गली में शोर है सारे नेता चोर है
देखते है वोटो के बाद क्या भष्टाचार और बढता है या रुकता है....!!!!
देखना ये है कि क्या होगा देश के भबिष्य का किसके हाथो में जाती है देश की बाग डोर....
और अन्ना हजारे भी क्या कर पायेंगे देश के लिए ये हम देख ही रहे है और आगे क्या होगा वो भी
देखा जायेगा पर आज महात्मा गाँधी होते तो अन्ना पर गर्व करते....!!!


( दर्शको 63वें गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें)
               वन्दे मातरम......सारे जहाँ से अच्छा हिन्दुस्तान हमारा....प्ररेणा वैश्य

Tuesday, 17 January 2012

काश लिफ्ट में कोई बटन नही होता तो क्या होता सोचा है कभी ?????


 लिफ्ट में कोई बटन नही होता  तो क्या होता पता ही नही चल पाता कि हम है किस मंजिल पर है तब क्या होता सब  लोग ये ही सोचने में लगे रहेते मेरा फ्लोर आने वाला है पता नही काहा पर आएगा लोगो कि एक और चिंता और पैदा हो जाती लोग ज़िन्दगी बहुत सरल चाहते है कि बटन दबाओ कि हम अपनी मंजिल पर पहुच जाये खुद कुछ नही करना चाहते सब पकी  पकाई खिचड़ी खाना चाहते है पता नही क्या होगा एस दुनिया का मै तो सोचती हूँ कि ज़िन्दगी में काश ये होता ये नही होता तो क्या होता काश काश में लोगो को सवाल उठाने है ये नही सोचते है जो है उसमे कुश रहे जो नही है वो हो जायेगा काश ये होता काश ये होता मै भी सोचती हूँ काश लोगो का कुछ हो पाए ....!!!
सोचा की कुछ लिखू लेकिन समझ नही आ रहा था लिखू क्या ,कहा से शरू करू लिखना, लिखने के लिए तो बहुत कुछ था लेकिन शब्द कम पड रहे थे,  की   अपनी भावनाओ  को किस प्रकार व्यक्त करू कैसे ज़िन्दगी का असली अर्थ क्या है लोगो को बताऊ ,समझ ही नही पाती थी , ज़िन्दगी में सुख और दुःख आते है  लेकिन हम सब ये भी कहते है ज़िन्दगी में  सुख और दुःख क्यों झेलने पड़ते है , क्यों कहा जाता है दुःख के बाद सुख आता है और सुख के बाद दुःख , मुझे तो कुछ  समझ नही आता है ज़िन्दगी इतने इम्तेहान क्यों लेती है,  मैं तो ज़िन्दगी के सवालों को सुलझा सुलझा के थक गई हूँ जितने सवालों को पूरा कर पाती  हूँ और एक सवाल बन कर सामने आ जाता है मन में सवालों के उत्तर खोजते खोजते कुछ और नया  सिखने को मिल जाता है ज़िन्दगी से तब भी लोग बोलते है लाइफ ओके है .....!!!!


  जब भी सुलझाना चाहा ज़िन्दगी के सवालों को मैंने 
हर एक सवाल में ज़िन्दगी मेरी उलझती चली गई....!!!!