Tuesday, 17 January 2012

सोचा की कुछ लिखू लेकिन समझ नही आ रहा था लिखू क्या ,कहा से शरू करू लिखना, लिखने के लिए तो बहुत कुछ था लेकिन शब्द कम पड रहे थे,  की   अपनी भावनाओ  को किस प्रकार व्यक्त करू कैसे ज़िन्दगी का असली अर्थ क्या है लोगो को बताऊ ,समझ ही नही पाती थी , ज़िन्दगी में सुख और दुःख आते है  लेकिन हम सब ये भी कहते है ज़िन्दगी में  सुख और दुःख क्यों झेलने पड़ते है , क्यों कहा जाता है दुःख के बाद सुख आता है और सुख के बाद दुःख , मुझे तो कुछ  समझ नही आता है ज़िन्दगी इतने इम्तेहान क्यों लेती है,  मैं तो ज़िन्दगी के सवालों को सुलझा सुलझा के थक गई हूँ जितने सवालों को पूरा कर पाती  हूँ और एक सवाल बन कर सामने आ जाता है मन में सवालों के उत्तर खोजते खोजते कुछ और नया  सिखने को मिल जाता है ज़िन्दगी से तब भी लोग बोलते है लाइफ ओके है .....!!!!


  जब भी सुलझाना चाहा ज़िन्दगी के सवालों को मैंने 
हर एक सवाल में ज़िन्दगी मेरी उलझती चली गई....!!!!

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